मल्लिकार्जुन खडगे का उद्देश्य किसी के व्यक्तिगत अपमान का नहीं रहा है: अशोक गहलोत
मारवाङअलख, बीकानेर। @kharge का उद्देश्य किसी के व्यक्तिगत अपमान का नहीं रहा है। वे भारत के सबसे अनुभवी राजनेताओं में से एक हैं और प्रधानमंत्री पद की गरिमा को समझते हैं। उनकी मंशा इस गरिमा के खिलाफ कभी हो ही नहीं सकती। "नानी याद दिला देना", "बाप की जागीर समझना" जैसे रिश्तों से जुड़े मुहावरे और लोकोक्तियां भारत की आम बोलचाल का हिस्सा हैं जो सदियों से चली आ रही हैं। जैसे 2025 में संसद में बोलते हुए गृहमंत्री श्री अमित शाह ने "साला" शब्द बोल दिया था। इनका अर्थ व्यक्तिगत न होकर भावनात्मक और अलंकारिक होता है। कल श्री खरगे ने जो कहा, वह भी इसी तरह की आम बोलचाल की शैली है इसलिए इस विषय पर भाजपा को हंगामा करने का अधिकार नहीं है।
भाजपा को आज मर्यादा और अमर्यादित भाषा की बातें याद आ रही हैं, लेकिन जब वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारतीय उपमहाद्वीप में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए शहीद होने वाले श्री राजीव गांधी के लिए अमर्यादित टिप्पणी की थी, तब भाजपा नेताओं की मर्यादा कहां चली गई थी?
भाजपा को हर मुद्दे पर राजनीति करने और जनता का ध्यान भटकाने के बजाय लोकतंत्र से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को लेकर भाजपा जिस तरह हंगामा कर रही है, उससे साफ है कि उसके पास जनता के असल मुद्दों पर जवाब देने के लिए कुछ नहीं है।
जब उत्तराखंड के हल्द्वानी में श्री खरगे की जनसभा के बाद आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोगों ने मंच का शुद्धिकरण किया था, तब यह गंभीर सवाल उठा था कि आखिर भाजपा और आरएसएस की विचारधारा में दलितों के प्रति इतनी घृणा क्यों है? कांग्रेस ने यह मुद्दा संसद में भी उठाया था। उस समय भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे.पी. नड्डा ने मामले की जांच कराने की बात कही थी। आज सवाल है कि उस जांच का क्या हुआ? जांच के नतीजे जनता के सामने क्यों नहीं रखे गए? इससे भाजपा की कथनी और करनी का अंतर उजागर होता है।
आज देश के सामने सबसे बड़ा सवाल वोट चोरी के आरोपों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता का है। कांग्रेस, युवा पीढ़ी और पूरा विपक्ष लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है। लेकिन इन सवालों पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कभी ऐसी गंभीरता नहीं दिखाई। जब विपक्ष और युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाते हैं, तब भाजपा जवाब देने के बजाय उन्हें विदेशी ताकतों से जोड़ने और उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाने लगती है।
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